निसरपुर जनपद के ग्राम कड़माल की निवासी राजश्री पाटीदार (राजश्री दीदी) के जीवन में स्व-सहायता समूह से जुड़ना आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा मोड़ सिद्ध हुआ है। वह अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद वे एक साधारण गृहिणी के रूप में जीवनयापन कर रही थीं। वर्ष 2021 में उन्होंने "अग्रसर आजीविका स्व-सहायता समूह" का गठन किया और महिलाओं के साथ बचत गतिविधियों की शुरुआत की।
कठिन परिश्रम और प्रशिक्षण से गढ़ा हुनर
समूह से जुड़ने के बाद राजश्री दीदी ने आर-सेटी (RSETI) धार से सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद अपने कौशल को और निखारने के लिए उन्होंने वर्ष 2025-26 में आईटीआई (ITI) उत्तीर्ण की। सुबह 3 बजे से उठकर घर का काम निपटाना और दिनभर प्रशिक्षण लेना उनकी कड़ी मेहनत और संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने अपने गांव की 35 महिलाओं को एकजुट कर जूट उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण भी आयोजित करवाया।
उद्यम क्रांति योजना से मिली पंख अपने सिलाई व्यवसाय को बड़े स्तर पर शुरू करने के लिए राजश्री दीदी ने मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण प्राप्त किया। वित्तीय सहायता मिलते ही उन्होंने 11 सिलाई मशीनों का पूरा सेटअप अपने घर पर स्थापित किया। वर्तमान में वे अपने सिलाई सेंटर के माध्यम से 10 अन्य महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार दे रही हैं।
सिलाई सेंटर शुरू करने के शुरुआती दो महीनों में ही उन्होंने लगभग ₹25,000 की आय अर्जित की है। वे स्कूल यूनिफॉर्म और वन्य वस्त्र सिलने जैसे बड़े ऑर्डर सफलतापूर्वक पूरे कर रही हैं। हाल ही में शासकीय पोर्टल पर वेंडर के रूप में पंजीकृत (Vendor Add) होने के बाद अब वे सरकारी टेंडर लेने के लिए भी सक्षम हो गई हैं।
राजश्री दीदी का यह सफर साबित करता है कि सही प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं के सहयोग और दृढ़ आत्मविश्वास से ग्रामीण महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से खुद आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती हैं। राजश्री दीदी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद ज्ञापित करती हैं वे कहती हैं कि प्रधानमंत्री की उद्यम क्रांति योजना महिलाओं के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।


