जबलपुर के गढ़ा पुरवा में जो बावड़ी कुछ समय पहले तक करीब तीस फीट तक मलबे, गंदगी और कीचड़ से पटी पड़ी थी, वह अब 'जल मंदिर' के रूप में लोगों के सामने है। बुधवार को वाराणसी से वडनगर की ओर बढ़ रही 'सेवा संकल्प यात्रा' के यात्रियों ने अपने जबलपुर प्रवास के दौरान इसी ऐतिहासिक बावड़ी का भ्रमण किया।

यात्रियों के साथ मौजूद लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से सैकड़ों वर्ष पुरानी इस बावड़ी को नया जीवन दिया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों के समर्पित प्रयासों से ही इसकी गहराई तक सफाई संभव हो सकी।

खास बातें

  • गढ़ा पुरवा की सैकड़ों वर्ष पुरानी बावड़ी करीब 30 फीट तक मलबे और कीचड़ से भरी थी, सफाई के बाद इसे जल मंदिर का स्वरूप मिला।
  • उजारपुरवा में स्थित क्षेत्र की दूसरी प्रमुख बावड़ी का भी जीर्णोद्धार किया जा चुका है।
  • सेवा यात्रियों ने बाजनामठ के समीप वृद्धाश्रम पहुंचकर वृद्धजनों को ताजे फल और दैनिक उपयोग की सामग्री दी।

मलबे से भरी बावड़ी से भव्य स्वरूप तक

मंत्री के मुताबिक सफाई से पहले बावड़ी की हालत ऐसी थी कि उसका मूल ढांचा ही दिखाई नहीं देता था। भीतर जमा मलबा और कीचड़ लगभग तीस फीट की ऊंचाई तक भरा हुआ था। परत दर परत सफाई के बाद ही इसका आज का भव्य और सुंदर रूप सामने आ सका।

यह काम किसी एक विभाग तक सीमित नहीं रहा। रिलीज के अनुसार कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आसपास के नागरिकों ने भी इसमें हिस्सा लिया, और यही सामूहिक श्रम बावड़ी के पुनर्जीवन का आधार बना।

उजारपुरवा की बावड़ी का भी जीर्णोद्धार

लोक निर्माण मंत्री ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री के विज़न के तहत ऐतिहासिक बावड़ियों को 'जल मंदिर' के रूप में पुनर्जीवित करने का काम चल रहा है। इसी कड़ी में क्षेत्र की दूसरी प्रमुख बावड़ी, जो उजारपुरवा में स्थित है, उसका भी जीर्णोद्धार किया जा चुका है।

यानी गढ़ा पुरवा अकेला उदाहरण नहीं है, बल्कि यह एक चल रही कड़ी का हिस्सा है। बावड़ियां पारंपरिक रूप से इलाके की जल संरचनाएं रही हैं और उनका संरक्षण स्थानीय धरोहर तथा जल स्रोत, दोनों से जुड़ा मामला है।

वृद्धाश्रम में बुजुर्गों से आशीर्वाद

जल मंदिर की ऐतिहासिकता और स्वच्छता देखने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और सेवा यात्रियों का समूह बाजनामठ के समीप स्थित वृद्धाश्रम पहुंचा। वहां यात्रियों ने वृद्धजनों का आशीर्वाद लिया।

इस दौरान बुजुर्गों को ताजे फल और दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री वितरित की गई। सेवा संकल्प यात्रा का यह पड़ाव इसी तरह धरोहर के अवलोकन और सेवा कार्य, दोनों को समेटे रहा।

गढ़ा पुरवा और उजारपुरवा की ये दोनों बावड़ियां अब साफ-सुथरे स्वरूप में हैं, इसलिए जबलपुर शहर और आसपास के लोग इन्हें देखने जा सकते हैं। यात्रा का अगला रुख वडनगर की ओर है।