ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM) नियम, 2026 के संबंध में आज प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), पटना द्वारा प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता में राजेश कुमार, राज्य समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण); रंजन कुमार चौधरी, उप सचिव, शहरी विकास एवं आवास विभाग (UDHD), स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) तथा लौकिक पारख, उप निदेशक, पटना उपस्थित रहे।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के राज्य समन्वयक राजेश कुमार ने ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में किए जा रहे कार्यों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन के प्रथम चरण में वर्ष 2019 तक मुख्य रूप से शौचालय निर्माण एवं खुले में शौच से मुक्ति (ODF) पर ध्यान केंद्रित किया गया। मिशन के दूसरे चरण में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
राजेश कुमार ने स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण (SWSG) का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2022 में बिहार 22वें स्थान पर था, जबकि अगले स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण में बिहार ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए शीर्ष राज्यों में स्थान प्राप्त किया। इस उपलब्धि में भागलपुर और सुपौल जैसे जिलों का अग्रणी प्रदर्शन रहा।
स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के राज्य समन्वयक रंजन कुमार चौधरी ने शहरी क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित प्रावधानों एवं व्यवस्थाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा लाए गए नए नियमों का प्रमुख उद्देश्य अपशिष्ट को केवल कचरा न मानकर उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करना है। यह सर्कुलर इकोनॉमी की अवधारणा के अनुरूप है, जिसमें अपशिष्ट से अधिकतम उपयोगी सामग्री एवं मूल्य प्राप्त करने पर जोर दिया जाता है।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं। ये नियम 2016 के पुराने नियमों का स्थान लेते हैं और 01 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हैं।
इन नियमों का मूल उद्देश्य है कचरे को केवल "फेंकने" की सोच से आगे बढ़कर उसे एक "संसाधन" के रूप में देखना। इसे चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) की ओर बढ़ना कहा जाता है।
इन नियमों को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने एक मॉडल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन उपविधि (Model SWM Bye-laws) तैयार की है। इसमें नियम 2026 के सभी प्रावधानों को शामिल किया गया है।
यह मॉडल उपविधि राज्य के सभी 264 शहरी स्थानीय निकायों के लिए है। इनमें नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत शामिल हैं। यह मॉडल उपविधि पूरे राज्य में एकरूप, स्पष्ट और कानूनी रूप से सशक्त ढांचा देगी।






