खंडवा जिले के रेवापुर गांव की कविता चौहान ने ड्रोन तकनीक को अपनी कमाई का साधन बनाया है। प्रशिक्षण के बाद वह 2 हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि में कीटनाशक का छिड़काव कर चुकी हैं और इससे 5.81 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है।

स्व-सहायता समूह से शुरू हुआ सफर

आर्थिक तंगी के बीच परिवार की जरूरतें और बच्चों की पढ़ाई का खर्च संभालना कविता के लिए मुश्किल था। इसके बाद वह संत सेवालाल स्व-सहायता समूह से जुड़ीं, जिसमें गांव की 11 महिलाएं नियमित बचत कर रही हैं। समूह की बचत बढ़कर 24 हजार रुपये तक पहुंची।

खास बातें

  • 2 हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि में किया कीटनाशक छिड़काव
  • ड्रोन सेवाओं से 5.81 लाख रुपये से अधिक की आय
  • बैंक बीसी दुकान से हर महीने करीब 18 से 20 हजार रुपये की आमदनी

ग्राम संगठन और बैंक से मिले ऋण ने समूह की आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में मदद की। कविता ने समूह के माध्यम से 10 हजार रुपये का ऋण लिया और ऑनलाइन सेवाओं के साथ बैंक बीसी दुकान शुरू की। इससे उन्हें हर महीने करीब 18 से 20 हजार रुपये की आय होने लगी।

ग्वालियर में सीखा ड्रोन संचालन

कविता ने ग्वालियर में आयोजित ‘नमो ड्रोन’ प्रशिक्षण में हिस्सा लिया और ड्रोन चलाने की दक्षता हासिल की। इसके बाद वह ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में कृषि क्षेत्र में कीटनाशक छिड़काव की सेवा देने लगीं।

ड्रोन से हुई आय ने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बच्चों की पढ़ाई सहित घरेलू जरूरतें पूरी करने में सहारा दिया। बैंक बीसी दुकान और कृषि सेवा के रूप में उनके पास आय के दो माध्यम बने हैं।

दूसरी महिलाओं को भी समूह से जुड़ने की प्रेरणा

कविता गांव की अन्य महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उन्हें आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला योजना और लाड़ली बहना योजना का लाभ भी मिला है।